Skip to main content

मरती संवेदनाएं


आज संवेदनाएं
   मर चुकी हैं
स्वार्थपरता की भट्ठी
  में पूरी तरह जर चुकी हैं 
दैवीय आपदाओं से मरते हुए घुरहू, काशी,
पत्तू  के लिए भी  संवेदनाएं अपनी
 भाषाई जुब़ान खो चुकी है 
  सड़क पर प्रजनन करती 
इक्कीसवीं सदी की स्त्रियां 
 स़िर्फ जादूगर का तमाशा है 
जहां तमाशबीन का मौन 
घुट रही संवेदनाओं की एक बेजान भाषा है
  यह एक यक्ष प्रश्न खड़ा है
   समाज व राष्ट्र के 
सामने अनुत्तरित सा पड़ा है
किसी की मुट्ठी में शूल आ जाए
किसी की मुट्ठी में फूल आ जाए 
      इस पर भी
किसी प्रतिक्रिया का न उठना 
  हमारी संवेदनाओं
   का दम तोड़ना है!
  किस युग में जी रहे हैं 
रोज़ संवेदनाओं को क्यों पी रहे हैं
  किसी दिन उलीच दें 
 तो संवेदनाओं की एक नई किरणों के आक्सीजन
  के सहारे ही
  कुछ लोगों को 
  बेंटीलेटर पर जाने से
 रोका जा सकता है 
गुफ़ाओं में चिरकाल से पड़ी बजबजाती दुर्गन्धित असंवेदनशीलता की बंद मुट्ठियों 
के दरवज्जे की अर्गल
 को खोला जा सकता है
 
संपूर्णानंद मिश्र
 प्रयागराज फूलपुर
   7458994874

Comments

Popular posts from this blog

सिल्वर वैडिंग-अध्ययन

सिल्वर वैडिंग – मनोहर श्याम जोशी पाठ का सार- सिल्वर वेडिंग’ कहानी की रचना मनोहर श्याम जोशी ने की है| इस पाठ के माध्यम से पीढ़ी के अंतराल का मार्मिक चित्रण किया गया है| आधुनिकता के दौर में, यशोधर बाबू परंपरागत मूल्यों को हर हाल में जीवित रखना चाहते हैं| उनका उसूलपसंद होना दफ्तर एवम घर के लोगों के लिए सरदर्द बन गया था | यशोधर बाबू को दिल्ली में अपने पाँव जमाने में किशनदा ने मदद की थी, अतः वे उनके आदर्श बन गए| दफ्तर में विवाह की पच्चीसवीं सालगिरह के दिन ,दफ्तर के कर्मचारी, मेनन और चड्ढा उनसे जलपान के लिए पैसे माँगते हैं | जो वे बड़े अनमने ढंग से देते हैं क्योंकि उन्हें फिजूलखर्ची पसंद नहीं |यशोधर  बाबू के तीन बेटे हैं| बड़ा बेटा भूषण, विज्ञापन कम्पनी में काम करता है| दूसरा बेटा आई. ए. एस. की तैयारी कर रहा है और तीसरा छात्रवृति के साथ अमेरिका जा चुका है| बेटी भी डाक्टरी की पढ़ाईं के लिए अमेरिका जाना चाहती है, वह विवाह हेतु किसी भी वर को पसंद नहीं करती| यशोधर बाबू बच्चों की तरक्की से खुश हैं किंतु परंपरागत संस्कारों के कारण वे दुविधा में हैं| उनकी पत्नी ने स्वयं को बच्चों क...

नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया -अभ्यास

1. बालिका मैना ने सेनापति 'हे' को कौन-कौन से तर्क देकर महल की रक्षा के लिए प्रेरित किया ? उत्तर बालिका मैना ने अपने पिता के महल की रक्षा के लिए निम्नलिखित तर्क दिए- 1. मैना ने तर्क दिया कि महल को गिराने से सेनापति की किसी उद्देशय की पूर्ति न हो सकेगी। 2. मैना ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध शस्त्र उठाने वालों को दोषी बताया और कहा कि इस जड़ पदार्थ मकान ने कोई अपराध नहीं किया। 3. अंत में मैना ने सेनापति 'हे' को अपना परिचय देकर बताया कि उन्हें उनकी पुत्री मेरी की सहेली की रक्षा करनी ही चाहिए। 2. मैना जड़ पदार्थ मकान को बचाना चाहती थी पर अंग्रेज़ उसे नष्ट करना चाहते थे। क्यों ? उत्तर मैना उसी मकान में पली-बढ़ी थी। उसी में उसकी बचपन की, पिता की, परिवार की यादें समाई हुई थीं। इसलिए वह जड़ मकान उसके लिए भरी-पूरी ज़िंदगी के समान था। वह उसके जीवन का भी सहारा हो सकता था। इसलिए वह उसे बचाना चाहती थी। अंग्रेज़ों के लिए वह राजमहल उनके दुश्मन नाना साहब की निशानी था। वे उनकी हर निशानी को मिट्टी में मिला देना चाहते थे, ताकि देश में फिर से कोई अंग्रेज़ों के विरुद्ध आवाज़ न उठाए। 3. सर टामस '...