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Love is the key to know Existence परमात्मा

प्रेम में ईर्ष्या हो तो प्रेम ही नहीं है
प्रेम में भय हो तो प्रेम ही नहीं है

प्रेम के नाम से कुछ और ही रोग है
प्रेम के नाम से 
दूसरे पर मालकियत करने का मजा
दूसरे व्यक्ति का साधन की भाँति उपयोग 

प्रेमी अगर विश्वास न कर सके, 
श्रद्धा न कर सके, 
भरोसा न कर सके, 
तो प्रेम में फूल खिले ही नहीं।

ईर्ष्या, जलन, वैमनस्य, द्वेष, 
भय घृणा के फूल हैं। 

जो प्रेम से चूका....
वह परमात्मा से भी चूक जाता है। 

असली प्रेम उसी दिन उदय होता है 
जिस दिन इस सत्य को समझ पाते हैं 
कि सब तरफ परमात्मा विराजमान है।

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