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CBSE/NCERT class 9th samas समास

Samas/समास 

दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हुए एक नवीन एवं सार्थक शब्द को समास कहते हैं।

उदाहरण - 1. "माता और पिता" का समास है माता-पिता |
                  2. "चार रास्तों के समूह"  का समास चौराहा होता है |

समास के प्रकार :-

समास के छ: भेद होते हैं -

1. अव्ययीभाव समास 
2. तत्पुरुष समास 
3. द्विगु समास 
4. द्वंद्व समास 
5. कर्मधारय समास 
6. बहुब्रीहि समस 

अव्ययीभाव समास :-

जिस समास का पहला पद अव्यय हो उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। ज्यादातर पहला पद उपसर्ग होता है |

उदाहरण:-
  • जीवन - जीवन-भर
  • यथासामर्थ्य - सामर्थ्य के अनुसार
  • यथाशक्ति - शक्ति के अनुसार
  • यथाविधि- विधि के अनुसार
  • यथाक्रम - क्रम के अनुसार
  • भरपेट- पेट भरकर
  • प्रतिदिन - प्रत्येक दिन
  • बेशक - शक के बिना
  • निडर - डर के बिना
  • निस्संदेह - संदेह के बिना
  • प्रतिवर्ष - हर वर्ष
  • मरण - मरण तक
  • खूबसूरत - अच्छी सूरत वाली
जहां एक ही शब्द की बार बार आवृत्ति हो, वहां भी अव्ययीभाव समास होता है |
उदाहरण :- 
  • रातोंरात - रात ही रात में
  • हाथोंहाथ - हाथ ही हाथ में
  • घर घर - प्रत्येक घर 

तत्पुरुष समास :-

इस समास में दूसरा पद प्रधान होता है तथा दोनों पदों के बीच कारक चिन्ह का लोप हो जाता है | वहाँ तत्पुरुष समास होता है |
उदाहरण:-
    • देशभक्ति - देश के लिए भक्ति 
    • राजपुत्र -राजा का पुत्र
    • शराहत - शर से आहत 
    • राहखर्च - राह के लिए खर्च 
    • यशप्राप्त - यश को प्राप्त 
    • राजमहल- राजा का महल 
    • करुणापूर्ण -करुणा से पूर्ण 
    • यज्ञशाला - यज्ञ के लिए शाला 
    • पापमुक्त - पाप से मुक्ति 

    कर्मधारय समास

    इस समास का उत्तर पद अर्थात दूसरा पद प्रधान होता है। इस समास में विशेषण -विशेष्य और उपमेय -उपमान से मिलकर बनते हैं उसे कर्मधारय समास कहते हैं।
    उदाहरण :-
    • पीताम्बर - पीत है जो अम्बर
    • महात्मा -महान है जो आत्मा
    • लालमणि - लाल है जो मणि
    • नीलकंठ - नीला है कंठ जिसका
    • चरण कमल - कमल के समान चरण 

    द्विगु समास :-

    जिस समास का पूर्वपद संख्यावाचक विशेषण हो उसे द्विगु समास कहते हैं।

    उदाहरण :-
    1. दोपहर - दो पहरों का समाहार
    2. त्रिवेणी - तीन वेणियों का समूह
    3. पंचतन्त्र - पांच तंत्रों का समूह
    4. त्रिलोक - तीन लोकों का समाहार
    5. शताब्दी - सौ अब्दों का समूह
    6. पंसेरी - पांच सेरों का समूह
    7. सतसई - सात सौ पदों का समूह
    8. चौगुनी - चार गुनी

    द्वंद्व समास :-

    जिस समास के दोनों पद प्रधान होते हैं तथा विग्रह करने पर ‘और’, अथवा, ‘या’, एवं योजक चिन्ह लगते हैं , वह द्वंद्व समास कहलाता है।
    उदाहरण :- 
    • माता-पिता = माता और पिता 
    • नर-नारी =नर और नारी
    • गुण-दोष =गुण और दोष
    • देश-विदेश = देश और विदेश
    • अमीर-गरीब = अमीर और गरीब
    • जलवायु - जल और वायु 

    बहुब्रीहि समास :-

    जिस समास में कोई पद प्रधान नहीं होता दोनों पद के मिलने से तीसरे पद की ओर इशारा होता है बहुब्रीहि समास होता है |
    उदाहरण -
    • नीलकंठ =नीला है कंठ जिसका (शिव)
    • लम्बोदर = लम्बा है उदर जिसका (गणेश)
    • दशानन = दश हैं आनन जिसके (रावण)

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