Skip to main content

सर्वहारा की ज़िंदगी


*श्रम दिवस पर देश के असंख्य मजदूरों को मेरा शत् शत् नमन*
----------------------------
*हां मैं सर्वहारा हूं*
लेकिन हारा नहीं हूं 
  थका नहीं हूं 
   रुका नहीं हूं 
  झुका नहीं हूं
    टूटा नहीं हूं 
  कर्म में जुटा हूं 
  ईमान- पथ पर 
अविचलित होते हुए 
निरंतर अथक चलता ‌रहता हूं 
  रुकना मेरी किस्मत 
 की किताब में नहीं है
 चलना ही मेरी ज़िन्दगी है
 श्रमसीकर से नहाता हूं
  खर आतप में ही छांव पीता हूं 
     *हां मैं सर्वहारा हूं*
 एक अशेष ज़िंदगी जीता हूं
 स्वाभिमान के कुएं का खींचा            
पानी  ही पीता हूं
अपनी जांगर के
 बलबूते ही जीता हूं 
मोटी-मोटी चित्तीदार
 रोटियां ही मेरे लिए
 ‌विधाता का वरदान है 
यह भगवान विष्णु का
  दिया हुआ दान है
रोगमुक्त जीवन ही 
‌‌     मेरा संसार है
   भर रात सोता हूं 
दुःख में भी नहीं रोता हूं 
   धैर्य नहीं खोता हूं
   श्रम की कमाई है 
जिंदगी में समस्याओं की 
       ही खाईं है 
   ‌‌    फिर भी 
     ‌   हारा नहीं हूं
   ‌‌     थका नहीं हूं 
        रुका नहीं हूं
     निरंतर चलना ही 
   मेरी अशेष ज़िंदगी है
   क्योंकि मैं सर्वहारा हूं
   ‌‌  हां मैं सर्वहारा हूं!

रचनाकार- डॉ० सम्पूर्णानंद मिश्र

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

सिल्वर वैडिंग-अध्ययन

सिल्वर वैडिंग – मनोहर श्याम जोशी पाठ का सार- सिल्वर वेडिंग’ कहानी की रचना मनोहर श्याम जोशी ने की है| इस पाठ के माध्यम से पीढ़ी के अंतराल का मार्मिक चित्रण किया गया है| आधुनिकता के दौर में, यशोधर बाबू परंपरागत मूल्यों को हर हाल में जीवित रखना चाहते हैं| उनका उसूलपसंद होना दफ्तर एवम घर के लोगों के लिए सरदर्द बन गया था | यशोधर बाबू को दिल्ली में अपने पाँव जमाने में किशनदा ने मदद की थी, अतः वे उनके आदर्श बन गए| दफ्तर में विवाह की पच्चीसवीं सालगिरह के दिन ,दफ्तर के कर्मचारी, मेनन और चड्ढा उनसे जलपान के लिए पैसे माँगते हैं | जो वे बड़े अनमने ढंग से देते हैं क्योंकि उन्हें फिजूलखर्ची पसंद नहीं |यशोधर  बाबू के तीन बेटे हैं| बड़ा बेटा भूषण, विज्ञापन कम्पनी में काम करता है| दूसरा बेटा आई. ए. एस. की तैयारी कर रहा है और तीसरा छात्रवृति के साथ अमेरिका जा चुका है| बेटी भी डाक्टरी की पढ़ाईं के लिए अमेरिका जाना चाहती है, वह विवाह हेतु किसी भी वर को पसंद नहीं करती| यशोधर बाबू बच्चों की तरक्की से खुश हैं किंतु परंपरागत संस्कारों के कारण वे दुविधा में हैं| उनकी पत्नी ने स्वयं को बच्चों क...

नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया -अभ्यास

1. बालिका मैना ने सेनापति 'हे' को कौन-कौन से तर्क देकर महल की रक्षा के लिए प्रेरित किया ? उत्तर बालिका मैना ने अपने पिता के महल की रक्षा के लिए निम्नलिखित तर्क दिए- 1. मैना ने तर्क दिया कि महल को गिराने से सेनापति की किसी उद्देशय की पूर्ति न हो सकेगी। 2. मैना ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध शस्त्र उठाने वालों को दोषी बताया और कहा कि इस जड़ पदार्थ मकान ने कोई अपराध नहीं किया। 3. अंत में मैना ने सेनापति 'हे' को अपना परिचय देकर बताया कि उन्हें उनकी पुत्री मेरी की सहेली की रक्षा करनी ही चाहिए। 2. मैना जड़ पदार्थ मकान को बचाना चाहती थी पर अंग्रेज़ उसे नष्ट करना चाहते थे। क्यों ? उत्तर मैना उसी मकान में पली-बढ़ी थी। उसी में उसकी बचपन की, पिता की, परिवार की यादें समाई हुई थीं। इसलिए वह जड़ मकान उसके लिए भरी-पूरी ज़िंदगी के समान था। वह उसके जीवन का भी सहारा हो सकता था। इसलिए वह उसे बचाना चाहती थी। अंग्रेज़ों के लिए वह राजमहल उनके दुश्मन नाना साहब की निशानी था। वे उनकी हर निशानी को मिट्टी में मिला देना चाहते थे, ताकि देश में फिर से कोई अंग्रेज़ों के विरुद्ध आवाज़ न उठाए। 3. सर टामस '...