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नया कोर्स

चारों तरफ़ अफ़रा-तफ़री मची है
विधाता ने यह कैसी लीला रची है
जिसको देखो कोरोना- कोरोना
दुभर हो गया बिस्तर पर सोना
बस अड्डे से एयरपोर्ट तक
बैलगाड़ी से लेकर मालगाड़ी तक
गांव से लेकर शहर तक
खेत-खलिहान से नहर तक
जिसको देखो कोरोना- कोरोना
मलेरिया के मच्छर ने अपने उत्तराधिकारी से कहा
पगले! यह नया कोर्स आया है
हमको तो यह बहुत भाया है
इसमें कैरियर संवर जाएगा
अच्छी सैलरी के साथ एक मुश्त
एरियर, टैक्स काटकर मिल जायेगा
न्यू पेंशन स्कीम भी है इसमें
गवर्नमेंट भी आधा देगा
पगले सीट कम है जल्दी कर
प्रवेश ले ले ले ले !
नहीं फिर पछताएगा
यह वैश्विक स्कीम है
बार-बार मौका नहीं मिल पाएगा
डॉ०  सम्पूर्णानंद मिश्र जी की अन्य कविताएं पढ़ें

Comments

  1. व्वाव क्या कहना,मच्छर भी करोना से प्रभावित हो गये।गरम तवे पर अपनी रोटी सेकने को तैयार हो गये। बहुत बढिया।

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