Skip to main content

औपचारिकता बनाम होली

होली आती है
चली जाती
वैमनस्यता पर
होली का रंग
चढ़ता ही नहीं है
अपने भीतर के
मलाल से
लोगों ने भाई- चारे
के गुलाल को धो दिया है
अब भाभी देवर
दोनों के रिश्ते ‌में
हंसी- ठिठोली
की मिठास
कहां रह गई है !
अब होली में
निरहुआ भाभी की
चिकोटी के बिना
ही रह जाता है
हर भाभियां भी आज
निरहुआ  से डरी हुई हैं‌
रंग पुतवाए बिना ही पड़ी हुई हैं
बस औपचारिकता ही
शेष रह गई है
टूटे हुए संबंध
होली का पड़ाव
भी पार कर जाते हैं
होलिका हर साल
जल जाती‌ है
लेकिन कटुता बच‌ जाती है
अपने विजयी होने पर
दंभ भरकर भाई- चारे
को चिढ़ाती है मुंह बिराती है
यह एक यक्ष प्रश्न खड़ा है
मेरे सामने पूरी तरह
से निरुत्तर पड़ा है
आज के दिन नफ़रत के
उरग का‌ फन मिलकर
सबको कुचलना ‌होगा
उसकी सत्ता- समाप्ति के लिए
किसी न किसी को
गरल पीना होगा
सौहार्द को गले लगाना होगा
और होली ‌में सद्भावों
का रसपान कराना होगा
नहीं तो होली हो ली
ही रह जायेगी !

डॉ०  सम्पूर्णानंद मिश्र जी की अन्य कविताएं पढ़ें

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

Online MCQ test Vachya वाच्य

Loading…

CBSE Class 10 Online Quiz Balgovin Bhagat बालगोबिन भगत

कक्षा 10 के अन्य सभी पाठों के PDF/Audio/Vidio/Quiz Loading… कक्षा 10 के अन्य सभी पाठों के PDF/Audio/Vidio/Quiz

भक्तिन पाठ का सारांश - प्रश्न उत्तर सहित

भक्तिन लेखिका- महादेवी वर्मा पाठ का सारांश - भक्तिन जिसका वास्तविक नाम लक्ष्मी था,लेखिका ‘महादेवी वर्मा’ की सेविका है | बचपन में ही भक्तिन की माँ की मृत्यु हो गयी| सौतेली माँ ने पाँच वर्ष की आयु में विवाह तथा नौ वर्ष की आयु में गौना कर भक्तिन को ससुराल भेज दिया| ससुराल में भक्तिन ने तीन बेटियों को जन्म दिया, जिस कारण उसे सास और जिठानियों की उपेक्षा सहनी पड़ती थी| सास और जिठानियाँ आराम फरमाती थी और भक्तिन तथा उसकी नन्हीं बेटियों को घर और खेतों का सारा काम करना पडता था| भक्तिन का पति उसे बहुत चाहता था| अपने पति के स्नेह के बल पर भक्तिन ने ससुराल वालों से अलगौझा कर अपना अलग घर बसा लिया और सुख से रहने लगी, पर भक्तिन का दुर्भाग्य, अल्पायु में ही उसके पति की मृत्यु हो गई | ससुराल वाले भक्तिन की दूसरी शादी कर उसे घर से निकालकर उसकी संपत्ति हड़पने की साजिश करने लगे| ऐसी परिस्थिति में भक्तिन ने अपने केश मुंडा लिए और संन्यासिन बन गई | भक्तिन स्वाभिमानी , संघर्षशील , कर्मठ और दृढ संकल्प वाली स्त्री है जो पितृसत्तात्मक मान्यताओं और छ्ल-कपट से भरे समाज में अपने और अपनी बेटियों के हक की लड़ाई लड़त...