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पति पत्नी को सुख देना चाहता है
पत्नी पति को सुख देना चाहती है
पिता पुत्र को सुख देना चाहता है
पुत्र पिता को सुखी देखना चाहता है
सब सुख बांटने में लगे हैं
पर मजे की बात है....
पति पत्नी से, पत्नी पति से
पिता पुत्र से, पुत्र पिता से 
अंततः दुख पाता है....

कभी सोचा है ?
फूल खुशबू बांटता नहीं
बस खिल जाता है
और सुगंध फैल जाती है
सूरज प्रकाश बांटता नहीं
सूरज का होना ही प्रकाश है
जो....
स्वयं प्रफुल्लता से,
आनंद से,
भर जाता है
उसे बांटना नहीं पड़ता
अपने आप शुवास फैल ही जाती है....

शुप्रभात...!

Comments

  1. सूरज होना कोई आसान काम नहीं,एक सार्थक एवं निस्वार्थ पहल है, स्वयं को तपाने की, एक पुरज़ोर कोशिश है अपने अस्तित्व को गलाने की। और जिसने भी यह सीख लिया वह स्वतः ही एक सूर्य बन जाता है, फिर चाहे वह धरती का हो,घर का या सिर्फ एक आँगन का ही क्यों न हो।

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