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Today's thought

हमेशा प्रतिस्पर्धा में

तनाव पैदा होता है...

तुलना में

तनाव पैदा होता है ...

अतीत की बात सोचने में

तनाव पैदा होता है...

भविष्य की चिंता में

तनाव पैदा होता है...

और वर्तमान से चूकते हैं...

जो कि एकमात्र यथार्थ है।

प्रकृति कभी भी..

एक भी व्यक्ति को ..

बिना किसी अनूठे उपहार के नहीं भेजती

सिर्फ थोड़ी सी खोज…।

अपने भीतर की खोज...

और जो ऊर्जा तनावों में उलझी हुई है

वह सौंदर्य,

बन जाएगी.....!

जीवन में एक भी मौका ऐसा नहीं

जिसमें तनाव की जरूरत है।

यह सिर्फ बेहोशी

और अधैर्य 

के कारण होता है।

शुभ प्रभात...!

...x...


Comments

  1. Bilkul sahi bol rahe hai aap.bhagwan ne har kisi ko koi khas visheshta k saath bheja hai.apne andar ki khoj karni chahiye.

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