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VI

हिंदी
प्रथम सत्र (अप्रैल – सितंबर)
कक्षा –छठी
विषय – हिन्दी
तत्परता कार्यक्रम  (1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक)
पहला दिन- आत्मपरिचय
दूसरा दिन- स्वर व व्यंजन
तीसरा दिन- अनुनासिक व अनुस्वार
चौथा दिन- संयुक्ताक्षर
पाँचवाँ दिन- मूर्धन्य ध्वनियों(ड,ढ,ड़,ढ़)
छठा दिन- र और ऋ के विभिन्न रूप
सातवाँ दिन- वर्तनी की स्पष्टता
आठवाँ दिन- श्रुतलेख
नवाँ दिन- संज्ञा
दसवाँ दिन- लिंग व वचन
ग्यारहवाँ दिन – वाचन अभ्यास
बारहवाँ दिन – भावात्मक मौखिक अभिव्यक्ति
तेरहवाँ दिन- रचनात्मक लेखन
चौदहवाँ दिन- श्रुतभाव ग्रहण
पन्द्रहवाँ दिन- अभ्यास कार्य
महीना
वसंत भाग – 1,
बालरामकथा
प्रस्तावित क्रियाकलाप
योग्यता कौशल उद्देश्य, अवधारणा
सांकेतिक मूल्यांकन
अनुमानित कालांश
अप्रैल-मई
वह चिड़िया जो ,
बचपन।
अवधपुरी मे राम
जंगल और जनकपुर।
संज्ञा, विशेषण, क्रियाविशेषण।
कविता पाठ
कविता लेखन
परियोजना कार्य
अभिव्यक्ति
मौखिक अभिव्यक्ति
वाचन, श्रवण तथा लेखन कौशल
सस्वर वाचन
उच्चारण आत्मविश्वास
वाक् कौशल
वाक्य विन्यास
33
जून-जुलाई

नादान दोस्त,
चाँद से थोड़ी-सी गप्पे।
दो वरदान,
राम का वनगमन।
सर्वनाम, उपसर्ग,प्रत्यय, विराम-चिह्न, शब्दयुग्म, योजक।
पुनरावृत्ति कार्य(एफ ए-1)
कठिन शब्दों  का उच्चारण
कविता पाठ
संवाद लेखन
बहुविकल्पीय प्रश्न
मौखिक अभिव्यक्ति
वाचन, श्रवण तथा लेखन कौशल
उच्चारण
प्रस्तुतीकरण
सस्वर वाचन
चरित्र चित्रण
विषय ज्ञान
लिखावट
सक्रियता
रूचि
31
अगस्त
पुनरावृत्ति कार्य(एफ ए-1)
अक्षरों का महत्त्व,
पार नज़र के।
साथी हाथ बढ़ाना
चित्रकूट में भरत
विशेषण, मुहावरे, अनुच्छेद, निबंध।
वर्ग पहेली
परियोजना कार्य
अनुच्छेद लेखन
कविता पाठ
प्रश्न-मंच
परिचर्चा

लिखित अभिव्यक्ति
गृहकार्य
श्रुतलेख
मौखिक अभिव्यक्ति

सजगता
प्रस्तुतीकरण
वर्तनी शुद्धता
सस्वर वाचन
नियमितता
24
सितंबर

दंडक वन में दस वर्ष
वाक्यभेद, पत्र लेखन, अपठित गद्यांश
पुनरावृत्ति कार्य(एस ए-1)
बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न-मंच
मौखिक अभिव्यक्ति
लिखित अभिव्यक्ति

रोचकता
सार्थकता
प्रस्तुतीकरण
24

एफ.ए-1 = 10





एफ.ए-2 = 10





एस.ए-1 = 30





कुल = 50





द्वितीय सत्र 


महीना
वसंत भाग – 1,बालरामकथा
प्रस्तावित क्रियाकलाप
योग्यता कौशल
उद्देश्य, अवधारणा
सांकेतिक मूल्यांकन
अनुमानित कालांश
अक्टूबर
ऐसे-ऐसे,
टिकट अलबम।
सोने का हिरण
सीता की खोज।
पर्यायवाची, विलोम।
परियोजना कार्य
संवाद लेखन
लघुत्तरात्मक प्रश्न
मौलिकता
कल्पनाशीलता
वर्तनी शुद्धता
प्रस्तुतीकरण
आत्मविश्वास
नियमितता
11

नवम्बर
झाँसी की रानी,
जो देखकर  भी नहीं देखते।
राम और सुग्रीव।
परसर्ग, वाक्य निर्माण, समरूपी शब्द।
कविता पाठ
अनुच्छेद लेखन
परियोजना कार्य
स्वतंत्रता सेनानियों की सचित्र जानकारी
मौखिक अभिव्यक्ति
लिखित अभिव्यक्ति
सहयोग
चिंतनशीलता
सस्वर वाचन
प्रस्तुतीकरण
सहभागिता
उच्चारण
23
दिसम्बर
संसार पुस्तक है,
मैं सबसे छोटी होऊँ।
लंका में हनुमान।
योजक, क्रिया, विलोम शब्द, शब्द-युग्म।
पुनरावृत्ति कार्य
(एफ ए-3)
कविता पाठ
अनुच्छेद लेखन
परियोजना कार्य
मौखिक अभिव्यक्ति
लिखित अभिव्यक्ति
मौलिकता
सस्वर वाचन
उच्चारण
प्रस्तुतीकरण
सुलेख
18
जनवरी
PSA(समस्या समाधान आकलन) अभ्यास कार्य  लोकगीत,
नौकर।
लंका विजय।
शब्द परिवार, लिंगभेद।



लोकगीत संकलन
परिचर्चा
बहुविकल्पीय प्रश्न



मौखिक अभिव्यक्ति
लिखित अभिव्यक्ति
लोकसंस्कृति में रुचि



उच्चारण
प्रस्तुतीकरण
विषय का ज्ञान
15
फरवरी
वन के मार्ग में,
साँस साँस में बाँस।
राम का राज्याभिषेक।
प्रत्यय, पत्र लेखन, परसर्ग।
कविता पाठ
अनुवाद कार्य
परियोजना कार्य
कलात्मक प्रस्तुति
मौखिक अभिव्यक्ति
लिखित अभिव्यक्ति

सस्वर वाचन
स्मरण क्षमता
सजगता
उच्चारण

23
मार्च
पुनरावृत्ति कार्य(एस ए-2)
ओ.टी.बी.ए सेप्रश्नपूछेजाएँगे|





एफ.ए-3 = 10





एफ.ए-4 = 10





एस.ए-2 = 30





कुल = 50




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भक्तिन लेखिका- महादेवी वर्मा पाठ का सारांश - भक्तिन जिसका वास्तविक नाम लक्ष्मी था,लेखिका ‘महादेवी वर्मा’ की सेविका है | बचपन में ही भक्तिन की माँ की मृत्यु हो गयी| सौतेली माँ ने पाँच वर्ष की आयु में विवाह तथा नौ वर्ष की आयु में गौना कर भक्तिन को ससुराल भेज दिया| ससुराल में भक्तिन ने तीन बेटियों को जन्म दिया, जिस कारण उसे सास और जिठानियों की उपेक्षा सहनी पड़ती थी| सास और जिठानियाँ आराम फरमाती थी और भक्तिन तथा उसकी नन्हीं बेटियों को घर और खेतों का सारा काम करना पडता था| भक्तिन का पति उसे बहुत चाहता था| अपने पति के स्नेह के बल पर भक्तिन ने ससुराल वालों से अलगौझा कर अपना अलग घर बसा लिया और सुख से रहने लगी, पर भक्तिन का दुर्भाग्य, अल्पायु में ही उसके पति की मृत्यु हो गई | ससुराल वाले भक्तिन की दूसरी शादी कर उसे घर से निकालकर उसकी संपत्ति हड़पने की साजिश करने लगे| ऐसी परिस्थिति में भक्तिन ने अपने केश मुंडा लिए और संन्यासिन बन गई | भक्तिन स्वाभिमानी , संघर्षशील , कर्मठ और दृढ संकल्प वाली स्त्री है जो पितृसत्तात्मक मान्यताओं और छ्ल-कपट से भरे समाज में अपने और अपनी बेटियों के हक की लड़ाई लड़त...