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आलो आंधारि

आलो आंधारि

महत्त्वपूर्ण लघूत्त्रात्मक प्रश्नः-

प्र.1ः परित्यक्ता स्त्रियों को समाज में किन कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है ?
उ.- परित्यक्ता स्त्रियों को बेघर होने पर किराए के मकानों में रहकर जीवनयापन करना पड़ता है। गंदी बस्तियों में स्थित उन मकानों में न तो शौचालय होता है और न ही आस-पास स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण। उसे समाज के तरह-तरह के प्रश्नों का सामना करना पड़ता है, ताने सुनने पड़ते है, लोगों की कामुख/गंदी निगाहों का झेलना पड़ता है। उसकी दिनचर्या पर लोगों की कड़ी निगाह रहती है। उसकी सहायता के लिए उसके सगे-संबंधी भी आगे नहीं आते।

प्र.2ः बेबी को अपने पति का घर क्यों छोड़ना पड़ा ?
उ.- उसका विवाह 13 वर्ष की उम्र में अपने से दोगुनी उम्र वाले आदमी के साथ कर दिया गया था। शादी के बारह तेरह बर्ष तक तो उसने पति के अत्याचार सहन किए, किंतु अत्याचार जब सीमा से अधिक हो गए तो उसने अपने तीन बच्चों के साथ पति का घर छोड़ दिया।

प्र.3ः बेबी को तातुश के घर काम कैसे मिला ?
उ.- एक कोठी में ड्राइवर का काम करने वाले एक परिचित सुनील को जब यह पता चला कि बेबी को डेढ़ सप्ताह बाद भी कोई काम नहीं मिला है तब वह उसे तातुश के घर ले गया। उसी ने उसे वहाँ काम दिलाने में मदद की।

अन्य महत्त्वपूर्ण लघूत्त्रात्मक प्रश्नः-
प्र.4ः सजने-सँवरने के बारे में बेबी का नजरिया क्या था ?
प्र.5ः बेबी को अपनी माँ की मृत्यु का समाचार कब व कैसे मिला ?
प्र.6ः शर्मिला दी तथा बेबी के संबंधों के बारे में बताइए।
प्र.7ः बेबी को खुले आसमान के नीचे एक रात क्यों बितानी पड़ी ?
प्र.8ः बेबी की उसके बड़े लड़के से मुलाकात कैसे हुई ?
प्र.9ः तातुश के घर में आने पर बेबी के जीवन में क्या परिवर्तन आया ?

निबंधात्मक प्रश्न :

प्र.1ः घरेलू नौकरों को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है ?
उ.- घरेलू नौकरों को अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे-
1. निम्न जीवन स्तर :- पेट पालने के लिए घरेलू नौकर के रूप में काम करने वालों का जीवन स्तर बहुत निम्न होता है। कारण उन्हें काम के अनुसार उचित मजदूरी नहीं मिलती। आय कम होने से, अधिक किराया देने में असमर्थ होने के कारण उन्हें छोटे-छोटे, सुविधाहीन किराये के मकानों में रहना पड़ता है।
2. प्रातः जल्दी उठकर, बिना कुछ खाए-पिए काम में जुट जाना पड़ता है। फलतः वे कुपोषणजन्य विविध बिमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं। वे ढ़ग से पहन-ओढ़ भी नहीं पाते।
3. मालिक व उसके परिजनों के इशारों पर नाचना पड़ता है।
4. कार्य में देरी हो जाने या काम बिगड़ जाने पर डाँट सहनी पड़ती हैं। कभी-कभी तो गाली-गलौच व मारपीट भी सहनी पड़ती है।
5. कार्य के घंटे निर्धारित नहीं होते। सुबह से रात तक काम जुटे रहना पड़ता है। कभी कोई अवकाश भी नहीं मिलता।
6. आय कम होने के कारण उनके बच्चे भी पड़ लिख नहीं पाते है। फलतः वे भी घरेलू नौकर बनने पर मजबूर हो जाते है।
7. नौकरी में भी स्थायित्व नहीं होता। मालिक कब काम से हटा दे - यह भय सदा बना रहता है।
8. काम से हटा दिए जाने पर, नया काम मिलने तक बेरोजगार रहना पड़ता है।
9. घरेलू स्त्री नौकरों को तो कभी-कभी यौन-शोषण का शिकार भी बनना पड़ता है। बात न मानने पर चोरी आदि के आरोप लगाकर पुलिस के हवाले भी कर दिया जाता है।
इस प्रकार घरेलू नौकरों का जीवन गरीबी, विवशता व लाचारी की जीती जागती मिशाल बनकर रह जाता है।

अन्य निबंधात्मक प्रश्न
प्र.2ः बेबी के जीवन-निर्माण में तातुश के योगदान को रेखांकित कीजिए।
प्र.3ः बेबी के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।

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