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चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती

पाठ योजना
कक्षा –ग्यारहवीं
विषय- हिंदी
पाठ- चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती (त्रिलोचन)
समयावधि – नवम्बर 2016
पाठ का संक्षिप्त परिचय –
चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती नामक कविता धरती संग्रह में संकलित है। यह पलायन के लोक अनुभवों को मार्मिकता से अभिव्यक्त करती है। कविता में अक्षरों के लिए काले-काले विशेषण का प्रयोग किया गया है, जो एक और शिक्षा-व्यवस्था के अंतर्विरोधों को उजागर करता है तो दूसरी ओर इस दारुण यथार्थ से भी हमारा परिचय कराता है जहां आर्थिक मजबूरियों के चलते घर टूटते हैं। काव्य नायिका चंपा अनजाने ही उस शोषक व्यवस्था के प्रति पक्ष में खड़ी हो जाती है जहां भविष्य को लेकर उसके मन में अनजान खतरा है। वह कहती है 'कलकत्ते पर बजर गिरे'। कलकत्ते पर वज्र गिरने की कामना जीवन की खुरदरे यथार्थ के प्रति चंपा के संघर्ष और जीवट को प्रकट करती है।
क्रियाकलाप
कविता का उचित लय, यति और गति पूर्वक वाचन, प्रश्नोत्तरी|
गृहकार्य–
पाठ्य पुस्तक से अभ्यास प्रश्नों के उत्तर लिखना |
शिक्षक का नाम –
पद – पी.जी.टी. हिंदी
                                                           

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