Skip to main content

शब्दकोश, संदर्भ ग्रंथों की उपयोग की विधि 11

शब्दकोश, संदर्भ ग्रंथों की उपयोग की विधि और परिचय

शब्दकोश देखने की विधि - शब्दकोश में सम्मिलित शब्द वर्णमाला के वर्णों के क्रम में व्यवस्थित रहते हैं। अतः शब्दकोश देखने के पूर्व हमें वर्णमाला के ज्ञान के साथ-साथ शब्द का वर्ण-विच्छेद करना सीखना आवश्यक है।

शब्दकोश में शब्दों को इस वर्ण-अनुक्रम में दिया जाता है- अं, अ, आं, आ, इं, इ, ईं, ई, उं,उ, ऊं, ऊ, ऋ, एं, ए, ऐं, ऐ, ओं, ओ, औं, औ। इसके पश्चात् क से ह तक के वर्ण क्रम के अनुसार।

संयुक्ताक्षरों के विषय में यह बात विशेष ध्यान रखने योग्य है कि यदि मिले हुए वर्ण ऊपर-नीचे लिखे हैं तो ऊपर वाला वर्ण पहले स्थान पाएगा तथा नीचे वाला वर्ण बाद में स्थान पाएगा। एवं संयुक्ताक्षर की मात्रा नीचे वाले वर्ण की मानी जाएगी। जैसे-
1. शुद्धि = ( श्+उ) + (द्+ध्+इ)
2. प्रार्थना = (प्+र्+आ) +(र्+थ्+अ)+(न्+आ)

वर्ण -विच्छेद में मात्रा वाला स्वर सदा ही उस व्यंजन के बाद आता है जिस पर मात्रा लगी हो (भले ही मात्रा पीछे से लगी हो।
जैसे- सि = स्+इ
सी = स्+ई
आधे अक्षरों से पूर्व लिखी ‘इ’ की मात्रा उस अक्षर की न होकर अगले व्यंजन की होती है।
जैसे -स्थिति =स् + थि + ति
यदि मिले हुए वर्ण (संयुक्ताक्षर) ऊपर नीचे न होकर बराबर ऊँचाई पर लिखे हैं तो वर्णों का क्रम वही होगा जो दिखाई दे रहा है।
जैसे - शब्द = श+ब्+द्, पम्प = प+म्+प,  द्वार = द्+वा+र (न कि ‘ व्+दा+र)

निम्नांकित संयुक्ताक्षरों के वर्ण विच्छेद पर विशेष ध्यान दें-
क्ष =क्+ष्+अ           त्र = त्+र्+अ            ज्ञ = ज्+ञ्+अ           द्य=द्+य्+अ

अं तथ अः को स्वरों में नहीं गिना जाता है। अतः शब्दकोश में इनके लिए ओ,औ के बाद अलग से खंड नहीं होता। अनुस्वार ( बिंदु) तथा अनुनासिक (चंद्रबिंदु) वाले वर्ण शब्द कोश में सबसे पहले आएँगे। जैसे - ‘अंकुर’ तथा ‘अकुलाहट’ में से अंकुर पहले स्थान पाएगा, जबकि अकुलाहट बाद में आएगा। इसी प्रकार ‘इ’ तथा ‘इं’ में से इं से प्रारम्भ होने वाले शब्द पहले आएँगे तथा इ से प्रारम्भ होने वाले शब्द बाद में। जैसे -इंक व इकहरा में से इंक पहले आएगा तथा इकहरा बाद में आएगा।

Popular posts from this blog

सिल्वर वैडिंग-अध्ययन

सिल्वर वैडिंग – मनोहर श्याम जोशी पाठ का सार- सिल्वर वेडिंग’ कहानी की रचना मनोहर श्याम जोशी ने की है| इस पाठ के माध्यम से पीढ़ी के अंतराल का मार्मिक चित्रण किया गया है| आधुनिकता के दौर में, यशोधर बाबू परंपरागत मूल्यों को हर हाल में जीवित रखना चाहते हैं| उनका उसूलपसंद होना दफ्तर एवम घर के लोगों के लिए सरदर्द बन गया था | यशोधर बाबू को दिल्ली में अपने पाँव जमाने में किशनदा ने मदद की थी, अतः वे उनके आदर्श बन गए| दफ्तर में विवाह की पच्चीसवीं सालगिरह के दिन ,दफ्तर के कर्मचारी, मेनन और चड्ढा उनसे जलपान के लिए पैसे माँगते हैं | जो वे बड़े अनमने ढंग से देते हैं क्योंकि उन्हें फिजूलखर्ची पसंद नहीं |यशोधर  बाबू के तीन बेटे हैं| बड़ा बेटा भूषण, विज्ञापन कम्पनी में काम करता है| दूसरा बेटा आई. ए. एस. की तैयारी कर रहा है और तीसरा छात्रवृति के साथ अमेरिका जा चुका है| बेटी भी डाक्टरी की पढ़ाईं के लिए अमेरिका जाना चाहती है, वह विवाह हेतु किसी भी वर को पसंद नहीं करती| यशोधर बाबू बच्चों की तरक्की से खुश हैं किंतु परंपरागत संस्कारों के कारण वे दुविधा में हैं| उनकी पत्नी ने स्वयं को बच्चों क...

नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया -अभ्यास

1. बालिका मैना ने सेनापति 'हे' को कौन-कौन से तर्क देकर महल की रक्षा के लिए प्रेरित किया ? उत्तर बालिका मैना ने अपने पिता के महल की रक्षा के लिए निम्नलिखित तर्क दिए- 1. मैना ने तर्क दिया कि महल को गिराने से सेनापति की किसी उद्देशय की पूर्ति न हो सकेगी। 2. मैना ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध शस्त्र उठाने वालों को दोषी बताया और कहा कि इस जड़ पदार्थ मकान ने कोई अपराध नहीं किया। 3. अंत में मैना ने सेनापति 'हे' को अपना परिचय देकर बताया कि उन्हें उनकी पुत्री मेरी की सहेली की रक्षा करनी ही चाहिए। 2. मैना जड़ पदार्थ मकान को बचाना चाहती थी पर अंग्रेज़ उसे नष्ट करना चाहते थे। क्यों ? उत्तर मैना उसी मकान में पली-बढ़ी थी। उसी में उसकी बचपन की, पिता की, परिवार की यादें समाई हुई थीं। इसलिए वह जड़ मकान उसके लिए भरी-पूरी ज़िंदगी के समान था। वह उसके जीवन का भी सहारा हो सकता था। इसलिए वह उसे बचाना चाहती थी। अंग्रेज़ों के लिए वह राजमहल उनके दुश्मन नाना साहब की निशानी था। वे उनकी हर निशानी को मिट्टी में मिला देना चाहते थे, ताकि देश में फिर से कोई अंग्रेज़ों के विरुद्ध आवाज़ न उठाए। 3. सर टामस '...