Skip to main content

वे आँखें 11

वे आँखें
सुमित्रानंदन पंत

लहराते वे खेत दृगों में
हुआ बेदखल वह अब जिनसे,
हँसती थी उसके जीवन की
हरियाली जिनके तृन-तृन से!
आँखों ही में घूमा करता
वह उसकी आँखों का तारा,
कारकुनों की लाठी से जो
गया जवानी ही में मारा!

प्रश्न 1. किसानों को किससे बेदखल कर दिया गया?
उत्तरः- किसानों को उनके अपने खेतों से जमींदारों ने बेदखल कर दिया।

प्रश्न 2. किसान किसे देखकर फूला न समाता था?
उत्तरः- किसान अपनी हरी-भरी लहलहाती खेती को देखकर फूला न समाता था।

प्रश्न 3. जमींदार के कारिंदों ने भरी जवानी में किसे पीट-पीटकर मार डाला था?
उत्तरः- जमींदार के कारिंदों ने भरी जवानी में किसान के बेटे को पीट-पीटकर मार डाला था।

प्रश्न 4. कविता में किसान किसके शोषण की मार झेल रहे हैं?
उत्तरः- कविता में किसान जमींदारों के शोषण की मार झेल रहे हैं।

प्रश्न 5. ‘वे आँखें’ कविता में कवि के प्रतिपाद्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तरः- इस कविता में कवि ने युग-युग से शोषित किसान की स्वाधीनता के बाद के जीवन की दुर्दशा का मार्मिक चित्रण किया है। विकास की तमाम घोषणाओं के बावजूद उसके व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन में कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिलता। जिसके परिणाम स्वरूप भारतीय किसान भुखमरी के कारण आत्महत्या करने के लिए विवश दिखाई पड़ रहा है।

प्रश्न - निम्नलिखित पद्यांश का भाव सौन्दर्य  एवं शिल्प सौन्दर्य लिखिए |

अंधकार की गुहा सरीखी
उन आँखों से डरता है मन,
भरा दूर तक उनमें दारुण
दैन्य दुख का नीरव रोदन!

उत्तरः- भाव-सौंदर्य-
कवि ने किसान की दुर्दशा का मार्मिक चित्रण किया है। जिसकी आँखों में दूर-दूर तक अंधकार रूपी निराशा भरी हुई है। जिसके कारण उसकी आँखें रोती हुई भी चुप हैं।

शिल्प-सौंदर्य-

  •  अंधकार की गुहा सरीखी में उपमा अलंकार है।
  •  दारूण दैन्य दुख में अनुप्रास अलंकार है।
  •  भाषा सरल सुबोध शब्दों से युक्त खड़ी बोली है।
  •  स्वच्छंद कविता में लय और तुक नहीं है।

Popular posts from this blog

सिल्वर वैडिंग-अध्ययन

सिल्वर वैडिंग – मनोहर श्याम जोशी पाठ का सार- सिल्वर वेडिंग’ कहानी की रचना मनोहर श्याम जोशी ने की है| इस पाठ के माध्यम से पीढ़ी के अंतराल का मार्मिक चित्रण किया गया है| आधुनिकता के दौर में, यशोधर बाबू परंपरागत मूल्यों को हर हाल में जीवित रखना चाहते हैं| उनका उसूलपसंद होना दफ्तर एवम घर के लोगों के लिए सरदर्द बन गया था | यशोधर बाबू को दिल्ली में अपने पाँव जमाने में किशनदा ने मदद की थी, अतः वे उनके आदर्श बन गए| दफ्तर में विवाह की पच्चीसवीं सालगिरह के दिन ,दफ्तर के कर्मचारी, मेनन और चड्ढा उनसे जलपान के लिए पैसे माँगते हैं | जो वे बड़े अनमने ढंग से देते हैं क्योंकि उन्हें फिजूलखर्ची पसंद नहीं |यशोधर  बाबू के तीन बेटे हैं| बड़ा बेटा भूषण, विज्ञापन कम्पनी में काम करता है| दूसरा बेटा आई. ए. एस. की तैयारी कर रहा है और तीसरा छात्रवृति के साथ अमेरिका जा चुका है| बेटी भी डाक्टरी की पढ़ाईं के लिए अमेरिका जाना चाहती है, वह विवाह हेतु किसी भी वर को पसंद नहीं करती| यशोधर बाबू बच्चों की तरक्की से खुश हैं किंतु परंपरागत संस्कारों के कारण वे दुविधा में हैं| उनकी पत्नी ने स्वयं को बच्चों क...

नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया -अभ्यास

1. बालिका मैना ने सेनापति 'हे' को कौन-कौन से तर्क देकर महल की रक्षा के लिए प्रेरित किया ? उत्तर बालिका मैना ने अपने पिता के महल की रक्षा के लिए निम्नलिखित तर्क दिए- 1. मैना ने तर्क दिया कि महल को गिराने से सेनापति की किसी उद्देशय की पूर्ति न हो सकेगी। 2. मैना ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध शस्त्र उठाने वालों को दोषी बताया और कहा कि इस जड़ पदार्थ मकान ने कोई अपराध नहीं किया। 3. अंत में मैना ने सेनापति 'हे' को अपना परिचय देकर बताया कि उन्हें उनकी पुत्री मेरी की सहेली की रक्षा करनी ही चाहिए। 2. मैना जड़ पदार्थ मकान को बचाना चाहती थी पर अंग्रेज़ उसे नष्ट करना चाहते थे। क्यों ? उत्तर मैना उसी मकान में पली-बढ़ी थी। उसी में उसकी बचपन की, पिता की, परिवार की यादें समाई हुई थीं। इसलिए वह जड़ मकान उसके लिए भरी-पूरी ज़िंदगी के समान था। वह उसके जीवन का भी सहारा हो सकता था। इसलिए वह उसे बचाना चाहती थी। अंग्रेज़ों के लिए वह राजमहल उनके दुश्मन नाना साहब की निशानी था। वे उनकी हर निशानी को मिट्टी में मिला देना चाहते थे, ताकि देश में फिर से कोई अंग्रेज़ों के विरुद्ध आवाज़ न उठाए। 3. सर टामस '...