Skip to main content

पहलवान की ढोलक

पाठ योजना
कक्षा बारह्बीं
विषय- हिंदी
पाठ- पहलवान की ढोलक (फ़णीश्वरनाथ रेणु)
समयावधि
पाठ का संक्षिप्त परिचय
आंचलिक कथाकार फ़णीश्वरनाथ रेणु की कहानी पहलवान की ढोलक में कहानी के मुख्य पात्र लुट्टन  के माता-पिता का देहांत उसके बचपन में ही  हो गया था |  अनाथ लुट्टन को उसकी विधवा सास  ने पाल-पोसकर बड़ा किया | उसकी सास को गाँव वाले सताते थे | लोगों से बदला लेने के लिए कुश्ती के दाँवपेंच  सीखकर कसरत करके लुट्टन पहलवान बन गया |
 एक बार लुट्टन श्यामनगर मेला देखने गया जहाँ ढोल की आवाज और कुश्ती के दाँवपेंच देखकर उसने जोश में आकर नामी पहलवान चाँदसिंह को चुनौती दे दी | ढोल की आवाज से प्रेरणा पाकर लुट्टन ने दाँव लगाकर चाँद सिंह को पटककर हरा दिया और राज पहलवान बन गया | उसकी ख्याति दूर-दूर तक फ़ैल गयी| १५ वर्षों तक  पहलवान अजेय बना रहा| उसके दो पुत्र थे| लुट्टन ने दोनों बेटों को भी पहलवानी के गुर सिखाए| राजा की मृत्यु के बाद नए राजकुमार  ने गद्दी संभाली। राजकुमार को घोड़ों की रेस का शौक था । मैनेजर ने नये राजा को भड़काया, पहलवान और उसके दोनों बेटों के भोजनखर्च को भयानक और फ़िजूलखर्च बताया, फ़लस्वरूप नए राजा ने कुश्ती को बंद करवा दिया और पहलवान लुट्टनसिंह को उसके दोनों बेटों के साथ महल से निकाल दिया।
        राजदरबार से निकाल दिए जाने के बाद लुट्टन सिंह अपने  दोनों बेटों के साथ गाँव में झोपड़ी बनाकर रहने लगा और गाँव के लड़कों को कुश्ती सिखाने लगा| लुट्टन का स्कूल ज्यादा दिन  नहीं चला और जीविकोपार्जन के लिए उसके दोनों बेटों को मजदूरी करनी पड़ी| इसी दौरान गाँव  में अकाल और महामारी के कारण प्रतिदिन लाशें उठने लगी| पहलवान महामारी से डरे हुए लोगों को ढोलक बजाकर बीमारी से लड़ने की संजीवनी ताकत देता था| एक दिन पहलवान के दोनों बेटे भी महामारी की चपेट में आकर मर गए पर उस रात भी पहलवान ढोलक बजाकर  लोगों को  हिम्मत बंधा रहा था | इस घटना के चार-पाँच दिन बाद पहलवान की भी मौत हो जाती है|
पहलवान की ढोलक, व्यवस्था के बदलने के साथ लोक कलाकार के अप्रासंगिक हो जाने की कहानी है। इस कहानी में लुट्टन नाम के पहलवान की हिम्मत और जिजीविषा का वर्णन किया गया है। भूख और महामारी, अजेय लुट्टन की पहलवानी को फ़टे ढोल में बदल देते हैं। इस करुण त्रासदी में पहलवान लुट्टन कई सवाल छोड़ जाता है कि कला का कोई स्वतंत्र अस्तित्व है या कला केवल व्यवस्था की मोहताज है?
क्रियाकलाप
पाठ का यति गति के साथ  वाचन, स्थानीय आयोजनों पर परिचर्चा, प्रश्नोत्तरी  |
गृह कार्य
प्रश्न1- लुट्टन को पहलवान बनने की प्रेरणा कैसे मिली ?
प्रश्न2- रात के भयानक सन्नाटे में लुट्टन की ढोलक क्या करिश्मा करती थी?
प्रश्न3- लुट्टन ने सर्वाधिक  हिम्मत कब दिखाई ?
प्रश्न4- लुट्टन सिंह राज पहलवान कैसे बना?
प्रश्न5- पहलवान की अंतिम इच्छा क्या थी ?
प्रश्न6- ढोल की आवाज  और लुट्टन के में  दाँवपेंच संबंध बताइए-

शिक्षक का नाम – 
पद – पी.जी.टी. हिंदी
हस्ताक्षर

प्राचार्य 

Comments

Popular posts from this blog

सिल्वर वैडिंग-अध्ययन

सिल्वर वैडिंग – मनोहर श्याम जोशी पाठ का सार- सिल्वर वेडिंग’ कहानी की रचना मनोहर श्याम जोशी ने की है| इस पाठ के माध्यम से पीढ़ी के अंतराल का मार्मिक चित्रण किया गया है| आधुनिकता के दौर में, यशोधर बाबू परंपरागत मूल्यों को हर हाल में जीवित रखना चाहते हैं| उनका उसूलपसंद होना दफ्तर एवम घर के लोगों के लिए सरदर्द बन गया था | यशोधर बाबू को दिल्ली में अपने पाँव जमाने में किशनदा ने मदद की थी, अतः वे उनके आदर्श बन गए| दफ्तर में विवाह की पच्चीसवीं सालगिरह के दिन ,दफ्तर के कर्मचारी, मेनन और चड्ढा उनसे जलपान के लिए पैसे माँगते हैं | जो वे बड़े अनमने ढंग से देते हैं क्योंकि उन्हें फिजूलखर्ची पसंद नहीं |यशोधर  बाबू के तीन बेटे हैं| बड़ा बेटा भूषण, विज्ञापन कम्पनी में काम करता है| दूसरा बेटा आई. ए. एस. की तैयारी कर रहा है और तीसरा छात्रवृति के साथ अमेरिका जा चुका है| बेटी भी डाक्टरी की पढ़ाईं के लिए अमेरिका जाना चाहती है, वह विवाह हेतु किसी भी वर को पसंद नहीं करती| यशोधर बाबू बच्चों की तरक्की से खुश हैं किंतु परंपरागत संस्कारों के कारण वे दुविधा में हैं| उनकी पत्नी ने स्वयं को बच्चों क...

नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया -अभ्यास

1. बालिका मैना ने सेनापति 'हे' को कौन-कौन से तर्क देकर महल की रक्षा के लिए प्रेरित किया ? उत्तर बालिका मैना ने अपने पिता के महल की रक्षा के लिए निम्नलिखित तर्क दिए- 1. मैना ने तर्क दिया कि महल को गिराने से सेनापति की किसी उद्देशय की पूर्ति न हो सकेगी। 2. मैना ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध शस्त्र उठाने वालों को दोषी बताया और कहा कि इस जड़ पदार्थ मकान ने कोई अपराध नहीं किया। 3. अंत में मैना ने सेनापति 'हे' को अपना परिचय देकर बताया कि उन्हें उनकी पुत्री मेरी की सहेली की रक्षा करनी ही चाहिए। 2. मैना जड़ पदार्थ मकान को बचाना चाहती थी पर अंग्रेज़ उसे नष्ट करना चाहते थे। क्यों ? उत्तर मैना उसी मकान में पली-बढ़ी थी। उसी में उसकी बचपन की, पिता की, परिवार की यादें समाई हुई थीं। इसलिए वह जड़ मकान उसके लिए भरी-पूरी ज़िंदगी के समान था। वह उसके जीवन का भी सहारा हो सकता था। इसलिए वह उसे बचाना चाहती थी। अंग्रेज़ों के लिए वह राजमहल उनके दुश्मन नाना साहब की निशानी था। वे उनकी हर निशानी को मिट्टी में मिला देना चाहते थे, ताकि देश में फिर से कोई अंग्रेज़ों के विरुद्ध आवाज़ न उठाए। 3. सर टामस '...